गणेश चतुर्थी स्थापना(Ganesh Chaturthi Sthapana): Ganesh Chaturthi भारत का एक प्रमुख और भक्ति से भरपूर त्योहार है, जो भगवान श्री गणेश के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है और दस दिनों तक चलता है। इस दिन को गणपति बप्पा के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जब श्रद्धालु उन्हें घरों, पंडालों और मंदिरों में स्थापित करते हैं।
गणेश चतुर्थी स्थापना का महत्व
गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘सिद्धिविनायक’ कहा जाता है, जो हर कार्य में सफलता और शुभता प्रदान करते हैं। गणेश चतुर्थी स्थापना के माध्यम से भक्त गणेश जी का स्वागत करते हैं और उनसे जीवन में सुख-समृद्धि और ज्ञान की कामना करते हैं।
मान्यता है कि इस दिन गणपति जी पृथ्वी पर आते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना और उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
गणेश चतुर्थी स्थापना मुहूर्त 2025 | गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त 2025
गणेश स्थापना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय निम्नलिखित है:
- मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक
- चौघड़िया मुहूर्त: शुभ चौघड़िया मुहूर्त सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक है। इस समय में पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है
गणेश चतुर्थी स्थापना की विधि
गणेश चतुर्थी के दिन विशेष रूप से गणेश प्रतिमा की स्थापना की जाती है। यहां हम गणेश चतुर्थी स्थापना की पारंपरिक विधि को सरल शब्दों में प्रस्तुत कर रहे हैं:
1. मूर्ति चयन:
सर्वप्रथम मिट्टी की बनी हुई गणेश जी की प्रतिमा का चयन करें। इको-फ्रेंडली प्रतिमा आजकल अधिक प्रचलन में है, जो पर्यावरण के अनुकूल होती है।
2. स्थापना का स्थान:
घर या पंडाल में स्वच्छ स्थान पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीले कपड़े बिछाएं। फिर उस पर मूर्ति को स्थापित करें।
3. पूजा सामग्री:
कलश, अक्षत (चावल), सिंदूर, दूर्वा घास, मोदक, नारियल, पुष्प, दीपक, अगरबत्ती, फल आदि सामग्री तैयार रखें।
4. संकल्प और पूजन:
गणेश जी की प्रतिमा के सामने बैठकर संकल्प लें और गणपति की पूजा करें। उन्हें दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करें। फिर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
5. व्रत और उपवास:
कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और केवल फलाहार ग्रहण करते हैं। व्रत रखने से मन शुद्ध होता है और भक्ति में एकाग्रता आती है।
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गणेश चतुर्थी स्थापना पूजा सामग्री
गणेश चतुर्थी स्थापना पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है ताकि पूजा विधिपूर्वक और शुभ तरीके से पूरी हो सके:
गणेश चतुर्थी स्थापना पूजा सामग्री:
- गणेश जी की मूर्ति (मिट्टी या अन्य सामग्री की)
- स्थापना के लिए साफ और सजाया हुआ स्थान (पिंड या आसन)
- लाल कपड़ा या आसन कपड़ा
- धूप और दीपक (मोर पंख, घी का दीपक या तेल का दीपक)
- अगरबत्ती
- फूल (गुलाब, जूही, चंपा, आम के पत्ते)
- माला (मूल रूप से फूलों की माला या तुलसी की माला)
- कुमकुम और हल्दी
- चावल (कशर)
- नारियल
- मिठाई (मोडक, लड्डू, या अन्य प्रसाद)
- फलों का भोग (केला, सेब, अनार आदि)
- सिंदूर
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी)
- पानी रखने के लिए कलश (साफ पानी)
- रुई और साफ कपड़ा
- पान के पत्ते
- सप्तपदी के लिए लकड़ी की छड़ी या हल्का लकड़ी का चम्मच
- सात प्रकार के फल, अनाज या बीज (कुछ परिवारों में)
- माला जप के लिए माला
- पत्र या गणेश मंत्रों का प्रिंट या किताब
अतिरिक्त सामग्री:
- पूजा के लिए गणेश चतुर्थी के मंत्र
- हल्दी और कपूर
- गंगाजल (पूजा में शुद्धिकरण के लिए)
- खड़ी हुई राख (अक्षत)
पूजा के समय इन सामग्री का उपयोग विधिपूर्वक करें ताकि गणेश जी की स्थापना सफल और मंगलमय हो।
गणेश चतुर्थी स्थापना टाइम
2025 में गणेश चतुर्थी स्थापना का शुभ समय (मुहूर्त) कुछ इस प्रकार है:
गणेश चतुर्थी स्थापना शुभ मुहूर्त 2025:
- दिनांक: 27 अगस्त 2025 (बुधवार)
- स्थापना समय: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक
- शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक
ध्यान देने योग्य बातें:
- राहु काल: दोपहर 12:22 बजे से 1:59 बजे तक — इस समय पूजा न करें।
- स्थापना के लिए उपयुक्त समय के दौरान ही गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करें।
गणेश चतुर्थी स्थापना की विशेष बातें
- पूजा के दौरान ‘गणपति अथर्वशीर्ष’, ‘गणेश स्तोत्र’ और ‘गणेश चालीसा’ का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- गणेश जी को खासतौर पर मोदक अर्पित किया जाता है, जिसे उनका प्रिय भोग माना जाता है।
- हर दिन आरती और भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
पर्यावरण का ध्यान रखें
आज के समय में यह ज़रूरी है कि हम गणेश चतुर्थी स्थापना के दौरान पर्यावरण की भी रक्षा करें। मिट्टी से बनी प्रतिमा का उपयोग करें और विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब या घर में बाल्टी आदि का उपयोग करें, जिससे जल प्रदूषण को रोका जा सके।
निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी स्थापना न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज को एकजुट करने वाला पर्व भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि श्रद्धा, समर्पण और संस्कार के साथ जीवन में हर विघ्न को पार किया जा सकता है। आइए, इस गणेश चतुर्थी पर हम सब मिलकर पर्यावरण-संरक्षण और आध्यात्मिकता का सन्देश फैलाएं।
गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया!

